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13 January, 2019

Maithili Sharan Gupt In Hindi - मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय

Maithili Sharan Gupt In Hindi! मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय  Namskaar dosto mai Ranveer Verma aap sabhi ka tricks in hindi blog par bahut bahut sawagat hai dosto jaise ki aap sabhi ko malum hai ki kuch hi dino me up board ka exam hone wala hai  to mai usi ke liye kuch topic laya hu jiska name hai Maithili Sharan Gupt bio, मैथिलीशरण गुप्त की जीवन  परिचय!

Maithili Sharan Gupt In Hindi:-

मैथिलीशरण गुप्त का जीवन- परिचय:-
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म संवत 1993 वि० (सन 1886 ईस्वी ) में, चिरगांव ( जिला झांसी ) में हुआ था इनके पिता का नाम श्री रामचरण गुप्त था! सेठ रामचरण गुप्ता स्वयं एक अच्छे कवि थे! गुप्त जी पर अपने पिता का पूर्ण प्रभाव पड़ा! आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी से भी इन्हें बहुत प्रेरणा मिली! यह द्विवेदी जी को अपना गुरु मानते थे! गुप्त जी को प्रारंभ में अंग्रेजी पढ़ने के लिए झांसी भेजा गया! किंतु वहां इनका मन नहीं लगा; घर पर ही इनकी शिक्षा का प्रबंधन किया गया, जहां इन्होंने अंग्रेजी, संस्कृत और हिंदी का अध्ययन किया! गुप्त जी बड़े ही विनम्र, हंसमुख और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे! इनके काव्य में भारतीय संस्कृति का चित्रण हुआ है! इन्होंने अपनी कविताओं द्वारा राष्ट्र में जागृति तो उत्पन्न की ही, साथ ही सक्रिय रूप से असहयोग आंदोलन में भी भाग लेते रहे, जिसके स्वरूप इन है जेल भी जाना पड़ा! ‘साकेत’ महाकाव्य पर इन्हें हिंदी-- सम्मेलन,  प्रयाग से मंगला प्रसाद परितोषिक भी मिला! भारत सरकार ने गुप्त जी को इनकी साहित्य- सेवा के लिए पदम भूषण से सम्मानित किया और राज्यसभा का सदस्य भी मनोनीत किया! जीवन के अंतिम क्षणों तक यह निरंतर साहित्य- श्रीजन करते रहे! 12 दिसंबर, 1964 ईस्वी ( संवत 2021 वि० ) मां-भारती का यह महान साधक पंचतत्व में विलीन हो गया!


मैथिलीशरण गुप्त का साहित्यिक सेवाएं:-

गुप्त जी का झुकाव गीतिकाव्य की ओर था और राष्ट्र प्रेम इन की कविता का प्रमुख स्वर रहा! भारतीय संस्कृति का परिणाम चित्रण हुआ है! इन्होंने अपनी कविताओं द्वारा राष्ट्र में जागृति तो उत्पन्न की ही, साथ ही सक्रिय रूप से और सहयोग आंदोलनों में भी भाग लेते रहे, जिसके फलस्वरूप इन्हें जेल भी जाना पड़ा! ‘साकेत’ महाकाव्य पर इन हिंदी- साहित्य- सम्मेलन, प्रयाग से मंगलाप्रसाद परितोषिक भी मिला! भारत सरकार ने गुप्त जी को इनकी साहित्य सेवा के लिए पदम भूषण से सम्मानित किया और राज्यसभा का सदस्य भी मनोनीत किया!

मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएं:-
गुप्त जी की समस्त रचनाएं दो प्रकार की है--
(1)  अनूदित तथा (2) मौलिक!

इनकी अनुदित रचनाओं में दो प्रकार का साहित्य है-  कुछ काव्य और कुछ नाटक! अनूदित ग्रंथों में संस्कृत के यशस्वी नाटककार भास के ‘ स्वप्नवासवदत्ता’ का अनुवाद उल्लेखनीय है! ‘ वीरांगना’, ‘ मेघनाद- वध’, ‘ वृत्र- संहार’ आदि इनकी अनूदित रचनाएं है--

साकेत:-
यह उत्कृष्ट महाकाव्य है, जो ‘ श्री राम चरित्र मानस’ के बाद राम- काव्य का प्रमुख स्तंभ है!

भारत- भारती:-
इसमें भारत की संस्कृति और गौरव का गान किया गया है!


यशोधरा:-
इसमें बुध की पत्नी यशोधरा के चरित्र को उजागर किया गया है!
द्वापर, जय भारत, विष्णु प्रिया:--
इनमें हिंदू संस्कृति के प्रमुख पात्रों के चरित्र का पुनरावलोकन कर कवि ने अपनी पुनर्निर्माण उत्कृष्ट रूप में प्रदर्शित की है! गुप्त जी की अन्य प्रमुख काव्य- रचनाएं इस प्रकार है--  रंग में भंग, जयद्रथ वध, किसान, पंचवटी, हिंदू, सैरींन्ध्री, शिध्राज, नहुष, हिडिंबा, त्रिपथगा, काबा और कर्बला, गुरुकुल, वैतालिक, मंगल घट, अजीत आदि! ‘अनघ’, ‘ तिलोत्तमा’, ‘चंद्रहास’ नामक तीन छोटे-छोटे पदबध रूपक भी इन्होंने लिखे हैं!
मैथिलीशरण गुप्त की साहित्य में स्थान:-
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि रहे हैं! खड़ी बोली को काव्य की परिष्कृत करने का जो असाधारण कौशल इन्होंने दिखाया, वह अविस्मरणीय रहेगा! उन्होंने राष्ट्रीय को जगाया और उसकी चेतना को वाणि दी है! ये भारतीय संस्कृति के यशस्वी उद्गाता एवं परम वैष्णव होते हुए भी विश्व बंधुत्व की भावना से ओत-प्रोत थे! ये सच्चे अर्थों में इस राष्ट्र के महनीय मूल्यों के प्रतिक और आधुनिक भारत के सच्चे राष्ट्र कवि थे!
तो दोस्तों उम्मीद करता हु की आप सभी को हमारा पोस्ट अच्छा लगा होगा, वैसे बता दू की आज का हमारा topic मैथिलीशरण गुप्त पर था तो अगला topic आप बताइए की हमारा kya मैथिलीशरण गुप्त पर ही रहे या किसी और पर वैसे अगर आपको कुछ समझने में परेशानी हुई तो हमें comment में बताइए हम आपकी हेल्प करेंगे! अपनी कीमती समय देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद्!

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