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24 December, 2018

Ramdhari Singh Dinkar In Hindi - रामधारी सिंह जी की जीवन परिचय

Ramdhari Singh Dinkar In Hindi. Hello dosto aap sabhi ko malum hoga ki kuch hi dino me 12th ke up board ke exame hone wale hai aur mai chahata hu ki aap kuch aise knowledge ko lijiye jisase aap kuch jaan sake aur aap adheek adeek se number la paye isiliye mai aap sabhi ke liye ek achha trick laya hu jiska name hai Ramdhari Singh Dinkar ji ka jeevan parichaye to chaliye shuru karte hai Ramdhari Singh Dinkar Biography In Hindi.

Ramdhari Singh Dinkar In Hindi:-

श्री रामधारी सिंह ‘ दिनकर’ का जन्म 30 सितंबर, 1908 ईस्वी ( संवत 1965 वि० ) को जिला मुंगेर ( बिहार ) के सिमरिया नामक ग्राम में हुआ था! रामधारी सिंह के पिता का नाम श्री रवी सिंह और माता का नाम श्रीमती मनरूप देवी था! इनकी 2 वर्ष की अवस्था में ही पीता का देहावसान हो गया; अतः बड़े भाई बसंत सिंह और माता की छत्रछाया में ही ये  बढ़े हुए! इनकी आरंभिक शिक्षा गांव की पाठशाला में ही हुई! अपने विद्यार्थी जीवन में ही इन्हें आर्थिक कष्ट झेलने पड़े! विद्यालय के लिए घर से पैदल 10 मील रोज आना-जाना इन की विवशता थी! रामधारी सिंह ने मैट्रिक ( हाई स्कूल ) की परीक्षा मोकामा घाट स्थित रेलवे हाईस्कूल से उत्तऋण की और हिंदी में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके ‘भूदेव’ स्वर्णपदक जीता! 1932 इसवी० में पटना सेरामधारी सिंह ने बी०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की!

Ramdhari Singh Dinkar In Hindi - रामधारी सिंह जी की जीवन परिचय



ग्रामीण परंपराओं के कारण दिनकर जी का विवाह किशोरावस्था में ही हो गया! अपने परिवारिक दायित्व के प्रति दिनकर जी जीवन भर सचेत रहें और इसी कारण इन्हें कई प्रकार की नौकरी करनी पड़ी! सन 1932 ईस्वी में बी० ए० करने के बाद ये एक नए स्कूल में अध्यापक बने! सन 1950 ईस्वी में बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी- विभागध्याक्ष के पद पर नियुक्त किया! सन 1952 ईस्वी० से सन 1963 इस्वी तक ये राज्यसभा के सदस्य नियुक्त किया! सन 1952 ईस्वी से सन 1963 ईस्वी तक ये राज्यसभा के सदस्य मनोनीत किए गए! रामधारी सिंह को केंद्रीय सरकार के हिंदी-समिति का परामर्शदाता भी बनाया गया! सन 1964 इस्वी में ये भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति बने! दिनकर जी को कवि- रूप में प्राप्त सम्मान मिला! ‘ पदमभूषण’ की उपाधि, ‘ साहित्य अकादमी’ पुरस्कार, द्विवेदी पदक, डि०लीट० की मानद उपाधि, ‘ राज्यसभा की सदस्यता आदि इनके कृतित्व की राष्ट्र द्वारा स्वकृति के प्रमाण है! सन 1972 ईस्वी० में रामधारी सिंह ‘उर्वशी’ के लिए ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया! इसका स्वर्गवास 24 अप्रैल, 1974 इसवी० ( संवत 2031 वि० ) को मद्रास ( चेन्नई ) में हुआ!, Ramdhari Singh Dinkar In Hindi



Ramdhari Singh Dinkar ki sahityik sevaye / रामधारी सिंह की साहित्यिक सेवाएं:-

दिनकर जी की सबसे प्रमुख विशेषता उनकी परिवर्तनकारी सोच रही है! उनकी कविता का उद्भव युग में हुआ और वह प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नई कविता आदि के युगों से होकर गुजरी! इस दीर्घकाल में जो आरंभ से अंत तक उनके काव्य में रही, वह है उनका राष्ट्रीय स्वर! ‘दिनकर’ जी राष्ट्रीय भावनाओं के ओजस्वी गायक रहे हैं! इन्होंने देशाअनुसार की भावना से ओत-प्रोत, पीड़ितों के प्रति सहानुभूति की भावना से परिपूर्ण तथा क्रांति की भावना जगाने वाली रचनाएं लिखी है! यह लोक के प्रति निष्ठावान, सामाजिक दायित्व के प्रति सजग तथा जनसाधारण के प्रति समर्पित कवि रहे हैं!

Ramdhari Singh Dinkar ki kritiyan /रामधारी सिंह जी की कृतियां:-

दिनकर जी का साहित्य विपुल है, जिसमें काव्य के अतिरिक्त विविध-विसयक गद्य-रचनाएं भी है!
इनकी प्रमुख काव्य-रचनाएं:-
1. रेणुका, 2. हूंकार, 3. कुरुक्षेत्र तथा, 4. उर्वशी है!



इनके अतिरिक्त दिनकर जी के अन्य काव्यग्रंथ निम्नलिखित हैं-

5. खंडकाव्य- रश्मिर थी, 6. कविता-संग्रह--


(i) रसवंती, (ii) द्वंद्व गीत, (iii) सामधेनी, (iv) बापू, (v) इतिहास के आंसू, (vi) धूप और धुआं, (vii) नीम के पत्ते, (viii) नीलकुसुम, (ix) चक्रवाल, (x) कविश्री, (xi) सीपी और शंख, (xii) परशुराम की प्रतीक्षा, (xiii) स्मृति-तिलक, (xiv) हारे को हरिनाम आदि, 7. बाल-साहित्य-- धूप-छाह,मिर्च का मजा, सूरज का ब्याह!

Ramdhari Singh Dinkar ki sahitya me sthan / रामधारी सिंह जी की साहित्य में स्थान:-

दिनकर जी की सबसे बड़ी विशेषता है, उनका समय के साथ निरंतर गतिशील रहना! यह उनके क्रांतिकारी व्यक्तित्व और ज्वलंत प्रतिभा का परिचायक है! फलतः गुप्त जी के बाद ये ही राष्ट्रकवि पद के सच्चे अधिकारी बने और इन्हें ‘यूग-चरण’, ‘राष्ट्रीय-चेतना का वैतालिक’ और ‘जन- जागरण का अग्रदूत’ जैसे विशेषणो से विभूषित किया गया! ये हिंदी के गौरव है, जिन्हें पाकर सचमुच हिंदी कविता धन्य हुयी!




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